
पिछले हफ्ते अमेरिका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों — फ़ोर्डो, नतान्ज़ और इस्फ़हान — पर किए गए ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ हमलों की गूंज अभी भी दुनिया भर में सुनाई दे रही है। लेकिन हालिया एक गुप्त आर्मी इंटेलिजेंस रिपोर्ट से पता चलता है कि ये हमले शायद आशा से कहीं कम प्रभावी रहे — मात्र कुछ ही महीनों की देरी दर्ज की गई है नहीं कि न्यूक्लियर कार्यक्रम पूरी तरह ठप्प हो गया हो।
🧭 संवाददाता की रिपोर्ट
- डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि नीचे दफ़न परमाणु अवसंरचना और संवेदनशील युक्तियाँ क्षतिग्रस्त नहीं हुईं। कुछ यूरेनियम भंडार और सेंट्रीफ़्यूज तो हमले से पहले ही हटा लिए गए थे ।
- एपी (Associated Press) की रिपोर्ट के अनुसार, “निगरानी में मिली तस्वीरों ने दिखाया कि गोला-बारूद की बौछार मुख्य रूप से अंडरग्राउंड निर्माण में असरदार नहीं हुई” ।
- वॉशिंगटन पोस्ट में बताया गया कि फ़ोर्डो प्लांट की रास्तों को नोकि़ज़ किया गया था, लेकिन गहरे बंकरों तक पहुंचने और उन्हें पूरी तरह बदरंग करने में अभी भी इंजीनियरिंग संसाधन जुटाने की ज़रूरत है ।
💥 अमेरिका बनाम मीडिया – दो राय सामने
- राष्ट्रपति ट्रंप और प्रशासन ने इसे “पूर्ण सफलता” का दावा किया—“केंद्रीय अवसंरचनाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया”
- उधर, रिपोर्टलीक्स करने वाले इस घुसपैठ को ख़िलाफत कर रहे हैं—“गद्दारी” तक कह रहे हैं, और जांच की माँग कर रहे हैं ।
🌐 नतीजा और भविष्य की दिशा
- नेताओं में बहस तेज
कुछ सांसदों ने वॉर पावर एक्ट को भी सवालों के घेरे में लिया, जबकि विपक्षी दलों ने पारदर्शिता की मांग तेज़ की । - पूर्व-भविष्यवाणियाँ
कई विश्लेषकों का कहना है कि बेहद मज़बूत बंकर-बस्टर बमों के बावजूद, भूमिगत तंत्रिका को पूरी तरह निशाना नहीं बनाई जा सकी — कुछ विशेषज्ञ तो “सालों” तक रोका जा सकता है कहते हैं - वैश्विक प्रतिक्रियाएँ
यूरोपीय नेता और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी शांति और कूटनीति का आह्वान दोहरा रहे हैं। वहीं ईरान ने IAEA (एटॉमिक एनर्जी एजेंसी) के साथ सहयोग रोकने का ऐलान किया है ।
🔍 निष्कर्ष – असलियत क्या है?संक्षेप में:
- हमलों ने वास्तव में तीन परमाणु स्थलों के ऊपर ज़मीनी ढाँचे को बहुत प्रभावित किया, लेकिन अभी भी गहराई में रिस्क बरकरार है
- रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी वैज्ञानिकों को फिर से निर्माण शुरू करने में कुछ महीने लगाएंगे—न कि सालों
- राजनीतिक झड़पें जारी — प्रशासनियों, नेटवर्क्स और सांसदों में बहस चल रही है कि क्या यह रणनीति परमाणु निवारण के मकसद पर खरी उतरी